हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हिज़्बुल्लाह के सेक्रेटरी जनरल शेख़ नईम क़ासिम ने ईरानी संसद के स्पीकर मुहम्मद बाक़िर क़ालीबाफ़ के नाम अपने एक पैग़ाम में लेबनान और मुक़ावमती तहरीक के समर्थन पर ईरान का शुक्रिया अदा किया और कहा कि ईरान के मज़बूत मौक़िफ़ और कारगर सहयोग को पूरी तरह शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि लेबनान और पूरे इलाक़े में इसराइली फ़ौजी कार्रवाइयों को रोकने में ईरान का किरदार फ़ैसलाकुन और बेहद कारगर रहा है। ईरान हमेशा इंसाफ़, मुक़ावमत और मज़लूम क़ौमों के साथ खड़ा रहा है, और अगर दूसरे मुल्क भी यही रास्ता अपनाते तो अमरीका और इसराइल इतना असर और ताक़त हासिल नहीं कर पाता और फ़िलस्तीनी ज़मीन पर क़ब्ज़ा भी बरक़रार न रहता।
उन्होंने कहा कि ईरानी इस्लामी जम्हूरियत ने हमेशा हिज़्बुल्लाह और लेबनानी अवाम की बेशर्त समर्थन की मुक़ावमत के सियासी फ़ैसलों की ताईद की, उसकी सलाहियतों को मज़बूत किया और लेबनानी समाज की मदद में अहम किरदार अदा किया।
ईरान और इसराइल के दरमियान हालिया तनाव का ज़िक्र करते हुए शेख़ नईम क़ासिम ने कहा कि ईरान ने इसराइली आक्रामकता का मुक़ाबला करने के लिए बड़ी कीमत चुकाई है और अपने ख़िलाफ़ होने वाले हमलों का जवाब भी दिया है।
उन्होंने साफ़ अल्फ़ाज़ में कहा कि मैं खुले और दो-टूक अंदाज़ में कहता हूँ कि ईरान इज़्ज़त और वक़ार की निशानी है।
हिज़्बुल्लाह के सरबराह ने रहबर-ए-मोअज़्ज़म आयतुल्लाह ख़ामेनई राष्ट्रपति पिज़ेश्कियान, मुहम्मद बाक़िर क़ालीबाफ़, विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची, सिपाह-ए-पासदारान-ए-इंक़िलाब (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स), सशस्त्र बलों, विद्वानों और ईरानी संस्थानों का भी शुक्रिया अदा किया और कहा कि ईरानी अवाम की तरफ़ से मुक़ावमत के हक़ में होने वाले मुज़ाहिरे और एकजुटता का इज़्हार इस तहरीक की व्यापक लोकप्रिय समर्थन का सबूत हैं।
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